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Chapter 11. [बिल्लो का आशिक/Ishq truth revealed]

रात का वक्त,

मुंबई,

Meera Apartment ,

Block no 1515,

इश्क ने हाथ उठा दरवाजा खटखटाना चाहा। मगर ये क्या दरवाजा तो खुला था।

इश्क चौंकी। उसने धीरे से दरवाजा अंदर की तरफ धकेला।

की उसके कान में तेज गाने की आवाज आई।

Jo bhida tere naino se tanka

Toh aashiq surrender hua

इश्क  अंदर आई। सामने का नजारा देख उसकी आंखे चौंध्या गई।

रुद्रांश Shorts में सोफे पर चढा हुआ है। उसकी टी शर्ट उसके कंधे पर लटक रही थी। वो टी शर्ट अपने मुंह में छुपाया।

Tune sharma ke window se jhanka

Toh aashiq surrender hua

वहीं अभिमान नीचे खडा होकर अपने गले पर तोलीया घीस रहा था। वो भी शॉर्ट्स में था।

Aa~~ sun o ri gori, Mohabbat mein tohri

Na jaane kab June se December hua

Tune English mein~~~

Tune English mein jab humko danta

Toh aashiq surrender hua

अभिमान ने रुद्रांश के हाथ से टीशर्ट छीनी और हवा में फेंक दी। जो सीधा इश्क के मुंह पर लगी।

Song changed.....

मेरा चैन वैन सब उजड़ा

जालिम नज़र हटा ले

अभिमान और रुद्रांश अपनी मस्ती में , oohhuuhh oouuhh

रुद्रांश और अभिमान इतना चिपक कर खडे थे की उनके सीने आपस में टच हो रहे थे।

मेरा चैन वैन सब उजड़ा

जालिम नज़र हटा ले

बर्बाद हो रहे हैं जी तेरे अपने शहर वाले

मेरा चैन वैन सब उजड़ा

जालिम नज़र हटा ले

बर्बाद हो रहे हैं जी तेरे अपने शहर वाले

अभिमान ने अपना तोलीया रुद्रांश के पिछे से पेट तक लिया और आगे गाने के साथ बोला

" मेरी अंगड़ाई ना टूटे तू आजा

मेरी, अंगड़ाई, ना टूटे, तू आजा... "

रुद्रांश भी उसके साथ डांस कर रहा था।

कजरा रे कजरा रे तेरे कारे कारे नैना

कजरा रे कजरा रे तेरे कारे कारे नैना

हो कजरा रे कजरा रे तेरे कारे कारे नैना

हो कजरा रे कजरा रे तेरे कारे कारे नैना

अभिमान और रुद्रांश काफी खुश नजर आ रहे थे। उन्हें देख ऐसा लग रहा था की इन्हें किसी की नहीं पडी। दोनो अपनी मस्ती में जुम रहे थे।

उन्हें दुनियादारी से कोई मतलब नहीं था।

ये नजारा देख इश्क की आंखे बडी हो गई।  वो हल्का हंसी और टीवी की तरफ देखा। जहां पर म्युजिक चल रहा था।

उसने एक दफा रुद्रांश और अभिमान को देखा और फिर आसपास देखा।

इश्क की नजर हॉकी स्टीक और बेट पर गई। जो वहां कोने में पडा था।

इश्क के कान से अब तक फटने को हो गये थे। उसका दिमाग घुमा।

इश्क ने हाॅकी स्टीक उठाई और सीधा टीवी पर चार बार दे मारी।

टीवी की स्क्रीन ही उड गई। और टीवी टुटा वो अलग। गाना भी बंद हो गया।

ऐसे अचानक गाना बंद हो जाने पर और कुछ टुटने की आवाज पर रुद्रांश और अभिमान ने चेहरा घुमाकर टीवी को देखा।

सामने इश्क गुस्से में हाॅकी स्टीक लिए खडी है।

वो दोनो हैरान हो गये।

तभी वहां रुद्राक्ष भी आ गया। उसके हाथ में बाॅउल था। जिसमे वो अंडा मिक्स कर रहा था चाॅपस्टीक से।

वो पुछने आया था की गाना बंद क्युं हुआ?

रुद्राक्ष ने अपने सामने इश्क को देखा तो उसकी भौंहे चढ गई।

रुद्रांश, रुद्राक्ष,  अभिमान तीनो उक साथ " तुम यहां??? "

इश्क को हैरानी हुई " प्रोफेसर आप यहां? "

तीनो एक दुसरे की शक्ल देखने लगे।

रुद्राक्ष ने ठंडी आवाज में कहा " ये मेरा घर है तो यहां पल में ही रहूंगा ना? लेकिन तुम यहां क्या कर रही हो? "

" मैं..." इश्क के मुंह में ही रह गये। रुद्रांश बिच में कुदा और रुद्राक्ष को इश्क से थोडा दुर करते हुए बोला " तुम रुद्राक्ष को कैसे जानती हो? "

" प्रोफेसर है ये मेरे! लेकिन तुम यहां क्या कर रहे हो राणा? " इश्क ने अपने हाथ बांध लिये।

रुद्रांश " For god sake कमसकम मेरे नाम से बुलाओ..ये क्या राणा राणा लगा रखा है? रुद्रांश भी कह सकती हो ना? "

इश्क " कितना लंबा नाम है तुम्हारा... रु द् द्र आ अं श!...इससे अच्छा तो राणा ही है। बोलने भी इजी। "

रुद्रांश के जबडे कस गये।

रुद्राक्ष वहां से वापस किचन की तरफ जाते हुए " तुम्हें कोई डाउट हो तो कल काॅलेज में पुछ लेना अभी जाओ यहां से! "

इश्क अपने बाल फ्लीप करते हुए " इश्क सिंघानिया को कभी कोई डाउट नहीं होता। "

रुद्राक्ष ने मुड कर उसे देखा। रुद्रांश भी गहरी नजरो से उसे देखने लगा।

अभिमान तुरंत बोला " होगा भी कैसे?? तुम खुद एक डाउटेबल पीस हो। जो बात बात पर अपने नाम का नारा लगाती फिरती है। "

इश्क उसे घुरते हुए बोली " तुझे बडी मिर्ची लग रही है। "

अभिमान गुस्से में " तुम्हारी वजह से मेरी बाईक गैरेज में पडी है। "

इश्क भी अब गुस्से में आ गई " तो मैंने नहीं कहा था की सामने से आकर मुझसे मुंह लगा। तुझे ही शौख था तो मैंने तेरा शौख पुरा कर दिया। वैसे भी मुझे नहीं पता था की उस दिन तेरा मनहूस चेहरा देख मेरा दिन खराब होगा। वरना मैं तुझ जैसे किडे को कभी नजर उठा कर नहीं देखती। "

रुद्रांश और रुद्राक्ष एक दुसरे को हैरानी में देखने लगे।

रुद्राक्ष " क्या अभि जानता है इसे? "

रुद्रांश " शायद हां! "

" तुम्हारी तो मैं जान ले लुंगा!... " अभिमान ने गुस्से में इश्क के गले को पकड लिया।

इश्क अभिमान के खुले सीने पर हाथ रख उसे धक्का देते हुए " गला छोड दे घमंडी इंसान वरना मैं तेरे साथ पैर तोड दुंगी। "

इश्क ने जोर से उसे धक्का मारा तो अभिमान दिवाल से टकराया। कुछ शाॅपीस जमीन पर गीरकर टुट गये। कुछ अभिमान को पीठ पर लग गये।

अभिमान की " आहह "  निकल गई।

रुद्राक्ष और रुद्रांश तुरंत एक्शन में आ गये।

रुद्रांश इश्क के पास गया और रुद्राक्ष ने अभिमान को उठाया।

" तुम अब हद्द पार कर रही हो इश्क!  " रुद्रांश की आवाज अब काॅल्ड हो चुकी थी।

रुद्राक्ष ने अभिमानकी पिठ देखते हुए कहा " रुद्र फर्स्ट एड बाॅक्स दे। अभि का खुन बह रहा है। "

इश्क गुस्से में अभिमान को घुरते हुए बोली " इतनी भी नहीं लगा की Hospital में एडमिट करना पडे। "

रुद्राक्ष ने उसे गुस्से में घुरा। " दफा हो यहां से! "

इश्क भी उसी लहजे में " मुझे भी कोई शौख नहीं है आपके घर में डाका डालने का! और हां अगली दफा वाल्यूम स्लो रखना वरना इस दफा टीवी तोडा है अगली दफा हाथ पैर और गर्दन टुटेगी। "

अभिमान गुर्राया " हमारे घर में आकर हमें धमका रही हो? तुम जानती नहीं मेरा भाई कौन है? वो कितना पावरफुल इंसान है उसका तुम्हें अंदाजा भी नहीं है। रातो रात तुम्हें गायब करवा देगा। "

" Oohh myy godd " इश्क  ने अपने दोनो हाथ अपने गाल पर रख ड्रामा शुरु किया " हाये मैं तो डर गई तेरे भाई से। मेरे तो हाथ पैर कांपने लगे उस जिंगुर का नाम सुन। ये देख रोंगटे खडे हो गये। तुम्हारी इस वाहियात धमकी से मेरे कान से खुन निकल आया। " इश्क ने अपने कान को साफ किया।

अभिमान ने दांत पीस लिए।

रुद्रांश की मुठ्ठी कस गई। " जिंगुर और मैं ? "

रुद्राक्ष चुप ही रहा।

इश्क रुद्रांश को देख गुर्राई " अपने भाईयो से बात कर जल्द से जल्द मुझे तलाक देकर इस रिश्ते से आजाद करो। वरना मैं तुम चारो भाईयों की सांसे जिस्म से अलग कर दुंगी। "

" Whattt? " अब हैरान होने की बारी अभिमान की थी।

" क्या कहा फिर से कहना। " रुद्राक्ष भी कंफ्यूजन में बोला।

उन दोनो को लगा की उन्होंने गलत सुन लिया। शादी की बात अब तक किसी ने नहीं की थी। अभिमान और रुद्राक्ष को तो ये भी नहीं पता था की इश्क उनकी जबरदस्ती की बिवी है।

" यही की ये अपने..." इश्क के दिमाग की बत्ती जली।

वो रुद्रांश की तरफ घुमी " don't say की ये नमुना बाईकर और ये प्रोफेसर आदमी तुम्हारे भाई है। "

रुद्रांश सोफे पर बैठते हुए " हां ये दोनो मेरे भाई है। ये रुद्राक्ष राणा है। प्रोफेसर है। और ये अभिमान राणा है। ये दोनो ही मेरे भाई है। और गुरु से तो तुम मिल ही चुकी हों। "

उसने कितनी ही आराम से ये बात कह दी थी। मगर ये सुन इश्क को जो झटका लगा था वो....

इश्क ने दिवाल पकड ली। उसके लिए ये 440 वाॅल्ट का झटका ही था।

" ये तुम क्या बोल रहे हो? ये लडकी हमारी..." रुद्राक्ष की बात रुद्रांश ने पुरी की " बिवी है!! हम चारो की शादी इसी से हुई है। "

" क्याआआआ " अभिमान और रुद्राक्ष के पैरो तले जमीन खिसक गई।

अभिमान " ये बदतमीज लडकी हमारी बिवी नहीं हो सकती! "

रुद्राक्ष बिना किसी भाव के " इसके अंदर manners नाम की चिज नहीं है। बडो से कैसे बात करते है ये तक नहीं पता। हर बात पर रौब दिखाती है। और जो जरुरी बात थी वो ये की हमारी बिवी गुंगी थी। "

रुद्राक्ष आगे बोलो " लेकिन इसकी जुबान तो कैंची की तरह चलती है। गालीया और बेईज्जती करने के शब्द तो इसकी जुबान पर डेरा जमाकर बैठे है। "

" पता है मुझे! " रुद्रांश बेफिक्री से बोल पडा।

अभिमान रुद्रांश को देखते हुए " तो आपने अब तक बताया क्यों नहीं था? "

रुद्रांश ने गहरी सांस ली और कुछ कहता की इश्क की आवाज आई " मैं मैं जा रही हूं। मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा है। मुझे चक्कर आ रहे है। "

" शौख से जाओ। और दुबारा कभी मुडकर मत आना। " रुद्रांश बिना किसी भाव के बोला। वहीं रुद्राक्ष और अभिमान बस खामोशी से देख रहे थे।

इश्क उसे घुरते हुए " आना तो पडेगा ना। तुम चारो से तलाक लेने। और हो सके तो कल ही तलाक के पेपर भिजवा देना। "

" वहां तुम्हारे बाप का राज नहीं चलता की कल ही तुम्हें तलाक के पेपर मिल जाऐंगे। और तुमने वादा किया था की तुम पेहले हम चारो भाई की शादी कराओगी फिर तलाक लोगी। अपने वादे से मुकरने अच्छी बात नहीं होती अर्धांगिनी! " रुद्रांश की आवाज गहरी हो गई थी।

इश्क ने मुठ्ठी कस ली। " मैंने ऐसा कोई वादा नहीं किया था। "

रुद्रांश अपने नाखुनो को देखते हुए बोला " वादा ना सही बात तो की थी ना? और अपनी बात से मुकरना शायद इश्क सिंघानिया की आदत ना हो। तुम्हारी अकड़ और ईगो देख ऐसा मैं मान सकता हूं। I hope मेरी बात सच हो। "

इश्क ने दांत पीस लिए। " तुम्हें तो मैं देख लुंगी राणा! " बात अब इज्जत पर आ गई थी।

" शौख से देखना जानेमन! " रुद्रांश ने उसे फ्लाइंग किस दी।

इश्क ने गुस्से में मुंह फेर लिया। वो वहां से जाने के लिए मुडी की उसकी नजर अंडे पर पडी।

इश्क के होंठो पर तिरछी मुस्कान आ गई। " वैसे प्रोफेसर आप आमलेट बना रहे थे ना? " उसने रुद्राक्ष से पुछा।

रुद्राक्ष को कुछ अशुभ होने का संकेत दिखा। इश्क उसे ही शैतानी मुस्कान लिए देख रही थी।

रुद्राक्ष कुछ बोलता उससे पेहले ही इश्क ने वो फैटा हुआ अंडा सीधा रुद्राक्ष के मुंह पर फेंका।

मगर रुद्राक्ष ने फुर्ती दिखाई और वहां से साईड हट गया। और वो अंडा अभिमान के मुंह पर लगा।

अभिमान चौंका " इसकी मां की..chiiiii " अभिमान ने अपने हाथ को चेहरे पर फेरा। उसे बहोत गंदा महसूस हुआ।

रुद्रांश की हंसी निकल गई।  की एक मुक्का उसके गाल पर लगा। उसकी हंसी गायब हो गई।

रुद्रांश ने इश्क को गुस्से में घुरा। अभिमान भी कहां पिछे रहने वाला था। उसने अपने अंडे वाले हाथो को इश्क के चेहरे पर लगाना चाहा की इश्क भागी।

इश्क हाॅल में यहां वहां भाग रही थी। और उसके पीछे रुद्रांश और अभिमान। रुद्राक्ष अपना सिर पकड कर बैठा था।

  " रुक जा तु! " अभिमान गुस्से में गुर्राया।

इश्क सोफे पर चढते हुए " तेज भाग घमंडी! "

रुद्रांश " तुमने मुझे क्यों मारा? "

इश्क " तुम पर तो मैं कोडे बरसाउ वो भी कम है। "

रुद्रांश मायूस सा मुंह बनाते हुए " इतना बुरा भी नहीं हुं मैं! "

" बुरे नहीं घटिया इंसान हो! " रुद्रांश का जुबडा कस गया।

रुद्राक्ष चिल्लया " Enough is enoughhuh " रुद्राक्ष का पेंशन्स जवाब दे गया। 

उसके अचानक चिल्लाने पर इश्क जो सोफे पे चढ रही थी वो एक पल को डर गई और उसका पैर मुड गया और इश्क नीचे गिरने लगी। इश्क ने सपोर्ट के लिए अभिमान के कंधा पकडना चाहा।

मगर अंडे की वजह से अभिमान की उप्पर बाॅडी चीपचीपी हो गई थी। और इश्क उसे पकड नहीं पाई और पास ही पडे big beans काउच पर गीरी और वो काउच टुट गया और उसके अंदर के beans हाॅल में बिखर गये।

इश्क उन beans के बिच लापता हो गई थी।

अभिमान के चेहरे और छाती पर beans चिपक गई थी।

रुद्रांश और रुद्राक्ष के बाल पर भी beans लगी थी।

रुद्रांश आगे बढ इश्क को खडा करना चाहा मगर अंडा नीचे जमीन पर भी गिरा था तो उसका पैर फिसला और वो इश्क के उपर गीरा।

इश्क की चिख निकल गई। उसे ऐसा लगा की किसी ने उसे पहाड के नीचे रख दिया हो और पुरे पहाड का वजन उस पर आ गया हो।

रुद्रांश का चेहरा beans में धंसा था। वो इश्क के उपर था। इश्क गुस्से और दर्द में छत को देख रही थी।

रुद्रांश और इश्क एक दुसरे को घुर रहे थे की दोनो के कान में किसी लडकी की आवाज आई " बाॅस! "

रुद्रांश की आंखे छोटी हो गई।  घर पर उसे कौन बाॅस कह सकता था? उन दोनो ने आवाज की दिशा में देखा तो रुद्रांश के चेहरे का रंग उड गया।

रुद्राक्ष और अभिमान ने भी दरवाजे की तरफ देखा।

दरवाजे पर भवानी जी , भवन जी , गुरु और आराध्या हैरानी में खडे है । वो चारो रुद्रांश और इश्क को ही देख रहे थे।

वहीं इश्क ने गुरु को देख गुस्सा आ गया और गुरु ने इश्क को देख हैरानी हुई।  वो उसके घर में क्या कर रही है? क्या वो मरी नहीं?

भवानी जी और भवन जी आंखे फाडे, मुंह खोले उन चारो को देख रहे थे। अभिमान किसी मुर्गे की तरह लगा रहा था। अंडा पर वो सफेद बिन्स चिपक गई थी।

रुद्राक्ष की आवाज पर सभी होश में आए " दादू दादी आप यहां? "

इश्क रुद्रांश को धक्का देते हुए बोली " अब मेरे उपर से हटेगो? या पुरी रात मेरे उपर ही बितानी है! "

" ऐसी खुशनसीबी हमारी कहां? " रुद्रांश उठा और अपना हाथ इश्क की तरफ किया।

इश्क उसके हाथ को झटक कर गुस्सें में बोली " जहन्नुम में जाकर सडो। " वो खडी हो गई।

भवन जी तीनो भाई और इश्क को घुरते हुए मर्दाना आवाज  में " क्या हो रहा था यहां पर? तुम तीनो ऐसे नंगे क्यों घुम रहे हो? और ये लडकी कौन है? तुम्हारी बिवी कहां है? "

अभिमान जल्दी से आगे आकर बोला " दादू ये लडकी ही हमारी बीवी है! " उसके इतना कहने की देर थी की इश्क दनदनाते हुए पास जाकर उसके बाल खिंच कर किचकिचा कर बोली " कितनी बार कहू की मैं तुम लोगो की बीवी नहीं हूं। खबरदार जो आइंदा मुझे अपनी बीवी कहा!! "

" आह्ह बाल छोड़ चुड़ैल कहीं की! " अभिमान ने अपने बाल इश्क के हाथो से छुडाते हुए दर्द से बोला।

इश्क ने उसके बाल जोर से खींच कर छोड दिये। अभिमान के कुछ बाल इश्क के हाथ में आ गया।  " Aaahhh "

आराध्या रुद्रांश की तरफ आते हुए बोली " बाॅस आप ठिक हो ना? "

" हां मैं ठिक हूं पर तुम यहां क्या कर रही हो? तुम तो अपनी शादी करने गई थी ना? फिर मेरे भाई और मेरे दादा दीदी के साथ क्या कर रही हो? " रुद्रांश उसे घुरते हुए बोला।

" ये आपका भाई है? " आराध्या ने हैरानी से गुरु की तरफ उंगली कर कहा।

रुद्रांश " हां! " आराध्या को झटका लगा। उसकी शादी उसके बाॅस के भाई से हुई थी।

वहीं भवन जी और भवानी जी इश्क को सिर से पैर तक देख रहे थे।

इश्क खुले बाल, ओवर साईज टि शर्ट जिसकी आगे से नोड बनाकर बांध रखा था और ओवर साईज बाॅटम में खडी थी।

इश्क उन दोनो को देख थोडा घबराकर बोली " आप दोनो ऐसे क्यों देख रहे हो? "

रुद्राक्ष आगे आया। इश्क को भवन जी और भवानी जी के सामने खडा कर " ये हमारे दादा दादी है। "

इश्क नासमझी से बोली " तो मैं क्या करु? "

रुद्राक्ष जबडा कसते हुए " तुम्हारे दादा ससुर और दादी सास है। पैर छुओ इनके! "

इश्क अपने बाल हवा में फ्लिप कर घमंड से बोली " इश्क सिंघानिया किसी के पैरो में नहीं गीरती। "

रुद्राक्ष ने दांत पीस लिए। ये लडकी किसी की बात क्यों नहीं मानती?

आराध्या इश्क को देख " इश्क!  तुम सात आठ साल पेहले लखनऊ में रहती थी ना? "Class 12th-C" Morden era school? "

" हां पर तुम मुझे कैसे जानती हो? " इश्क आराध्या को गौर से देखते हुए बोली। उसके दिमाग में तुरंत कुछ आया " तुम आराध्या पंडित हो ना? वो पंडित की बेटी? "

आराध्या के हाथो की मुट्ठी कस गई। " आराध्या श्री वास्तव! "

इश्क ने मुंह बिगाडा " क्या ही फर्क पडता है। "

अभिमान ने तुरंत कहा। " दादू दादी आप बैठिए ना! "

भवानी जी घर की हालत देख अभिमान से बोली " तुम लोगो का चिडियाचोरा खत्म हो जाए तो हम बैठ जाऐंगे!! वैसे घर को तो मुर्गा घर बना कर रखा है। और एक चलता फिरता मुर्गा भी पाल रखा है। "

रुद्रांश अभिमान और रुद्राक्ष ने चारो तरफ देखा।

सफेद बिन्स हाॅल में फैली थी। टीवी टुटा हुआ।  कुछ शो पीस जमीन पर गीरे थे। कांच बिखरा था। और इन सबसे बेमतलब इश्क एक साईड खडी थी।

" मेरा घर थोडी है जो मैं साफ करु! " इश्क मन ही मन बोली।

रुद्राक्ष इश्क को देख शांत आवाज में बोला " इश्क जरा ये साफ कर दो। " इश्क हैरानी से उसे देखने लगी।

" प्रोफेसर आप बुढे हो रहे हो ये मैं मानती हूं की बुढापे में दिमाग सठिया जाता है। कुछ याद नहीं रहता। इसका मतलब ये नहीं की आप मुझसे अपना घर साफ करवाए। मैं साफ नहीं करुंगी। आप खुद कर ले। आपके हाथो में मेहंदी नहीं लगी। " रुद्राक्ष दांत पीसता रह गया।

वो सिर्फ  32 का था। इतना भी बुढा नहीं हुआ था जितना इश्क ने उसे बना दिया था।

इश्क वहां से जाने लगी की उसकी नजर गुरु पर गई।

जो सूटकेस के पिछे अपना सिर छुपाकर बैठा था। अगर गलती से भी वो इश्क के सामने आ गया तो पेला जाएगा। वो इश्क से छुपा चाहता था पर कहते है ना मुसीबत सात समंदर पार करके भी तुम तक पहुंच ही जाती है। लेकिन यहां तो सिर्फ सात कदम की दुरी थी।

इश्क का गुस्सा जो शांत हो गया था वो भडक उठा और उसने एक लात गुरु की पीठ पर दे मारी। वो लुढ़क कर आगे गीरा।

" आह तेरी मां की...." गुरु आगे कुछ बोल पाता की इश्क उसका काॅलर पकड " अब बोल तु! मेरी मां की क्या? " उसने अपनी आईब्रोज उपर उठा ली।

तभी भवन जी गुस्से में गरजे " बस अब बहोत हुआ। "

सब उन्हें देखने लगे।

" सबने मिलकर घर को चिडिया घर बना रखा है। सारे के सारे पांच मिनट के अंदर घर साफ करो और अभिमान तुम अपना चेहरा साफ करो। चलता फिरता मुर्गा लग रहे हो। "

अभिमान ने अब जाकर खुद की हालात देखी। उसे ऐसे देख उसके भाई , इश्क और आराध्या हंसने लगी।

पांच मिनट बाद ,

सोफे पर भवन जी और भवानी जी बैठे थे। उनके पास के राउंड सोफे पर रुद्रांश, रुद्राक्ष, अभिमान बैठे है, उन्हें ने अब टि शर्ट पहन ली थी। सामने काउच पर गुरु और आराध्या बैठे है। वहीं इश्क को जबरदस्ती रुद्रांश ने स्टूल पर बैठाया था। वो तो यहां से जाना चाहती थी पर किसी ने उसे जाने नहीं दिया।

काॅफी टेबल पर चाई के पांच कप रखे थे। चाई रुद्राक्ष ने बनाई थी।

भवानी जी इश्क को देखते हुए बोली " तुम्हारा नाम इश्क है? और तुम हमारे घर की बहु हो? जो पेहले गुंगी थी और अब बोलने लगी? "

इश्क " मैं पैदाइश बोल सकती हूं। और मैं आपके घर की बहू नहीं हूं। ना मैं इस जबरदस्ती की शादी को मानती हूं ना आपके पोतो को खुद का पति। "

आराध्या जो चाई पी रही थी वो रुक गई।  " पोतो से शादी? ये क्या बात हुई। "

इश्क आराध्या के चेहरे के भावो को समझ बोली " तुम अपनी चाई पी लो। ये अंताक्षरी तुम्हारे दिमाग के बाहर है। " आराध्या का मुंह बन गया।

भवन जी कुछ सोचने लगे।

गुरु इश्क को घुरते हुए " तुम यहां कैसे पहुंची? "

इश्क खडी हो गई। रुद्रांश समझ गया की ये लडने के लिए खडी हुई है तो वो अपनी जगह से उठा और इश्क के सामने आकर " दोखो अभी कोई तमाशा मत करना। दादू चले जाए फिर जो करना है कर लेना। "

इश्क गुस्से में फुसफुसाते हुए " वो तो मैं कर ही लुंगी। उससे पेहले इस bh@--ve की तो मैं जान ले लुंगी। " उसकी फुसफुसाहट ऐसी थी की सबने बराबर सुन लिया था।

रुद्रांश ने अपना सिर पीट लिया।

वहीं अपने पति के लिए इश्क के मुंह से गाली सुन आराध्या गुस्से से भर गई " मेरे पति को गाली कैसे दी? "

" तुम्हारा पति गाली खाने लायक ही है। और एक सेंकेंड ये तुम्हारा पति?? " इश्क को थोडी हैरानी हुई।  रुद्रांश और बाकी सबका भी यही हाल था।

गुरु आराध्या का हाथ पकड प्यार से बोला " ये मेरी इकलौती बिवी आराध्या गुरु राणा है। " वो इंटेस नजरो से आराध्या को देखने लगा। आराध्या के गाल गुलाबी होने लगे।

इश्क की शक्ल बिगड गई। " ये अपना रोमांस रुम में जाकर करना। यहां पर हवस फैलाने की कोशीश मत करना। हम जैसे मासुम बच्चो पर क्या असर होगा? "

" यहां पर कोई मासुम नहीं है! और तुम अपनी बेशर्मी बंद करो " भवानी जी गुरु को घुरते हुए बोली।

उनकी बात पर आराध्या का चेहरा शर्म से जुक गया। उसे याद आ गया की गुरु ने उनके सामने ही उसे किस किया था।

लेकिन उनकी बात पर गुरु को कोई फर्क नहीं पडा।

भवन जी ने अब जाकर अपनी बात रखी " इश्क तुम्हारी शादी हमारे चारो पोतो से हुई है। "

आराध्या के पैरो तले जमीन खिसक गई " Kyyyyaaa?? "

गुरु ने भवन जी को घुरा। " क्या जरूरत थी मेरी बीवी के सामने ये बात करने की? "

" तुम्हारी पेहले से शादी हो चुकी है? तुमने मुझे बताया भी नहीं? तुमने मुझे धोखे में रखा? प्यार का जुठा दिखावा किया? और तुम्हारे साथ तुम्हारी दादी भी मीली हुई थी? तुम दोनो दादी पोतो के खिलाफ मैं पुलिस में complaint करुंगी। " आराध्या की आंखो में आंसू आ गये। उसकी आवाज नम हो गई।  वो गुरु से अटेच हो चुकी थी लेकिन गुरु ने उससे बात छुपाई जिससे आराध्या ने उसे गलत समझा। जोकि आराध्या ने सही किया।

गुरु को पेहले ही ये बात क्लीयर कर देनी चाहिए थी। वहीं गुरु के pov से देखे तो उसने कुछ गलत नहीं किया था। उसके हिसाब से इश्क मर चुकी थी।

आराध्या को रोता देख रुद्रांश को उसके लिए थोडा बुरा लगा।

कोई कुछ बोल पाता उससे पेहले इश्क की आवाज आई।

इश्क ने frustration में अपने बाल खिंच कर " प्लीज मुझे जाने दो। मेंरे exams आने वाले है। मैं पिछले एक घंट से यहां जख मरा रही हूं। अब मुझसे नहीं होगा। मुझे तुम लोगो का रोना धोना नहीं सुनना। मुझे किसी से कोई फर्क नहीं पडता। जिसको जो करना है करे। "

सब उसे गुस्से में देखने लगे। आराध्या रो रही थी और ये लडकी आग में घी डाल रही थी।

रुद्राक्ष को उसकी बात सही लगी। उसने ही exam का time table बनाया था तो वो इश्क को देख बोला " ठिक है तुम जाओ। मैं तुम्हें नोट्स दे दुंगा। "

तभी आराध्या की आवाज आई " तुम्हे कभी किसी के रोने से फर्क पडा है जो आज पडेगा। तुम खुदगर्ज हो इश्क। तुम्हारा मतलब खत्म होते ही तुम अपनी जिंदगी से इंसान को ऐसे निकाल फेंकती हो जैसे लोग चाई में पडी मक्खी को। तुम ने मुझसे बहुत कुछ छिना है इश्क।  पेहले मेरे friends फिर हेड गर्ल की पोजिशन, फिर वो सारी ट्रॉफीया जिस पर मेरा हक था। और आज तुमने मुझसे मेरा पती भी छीन लिया। तुम बहुत बुरी हो इश्क, हद्द से ज्यादा! "

वो एक ही बार में अपना जारा अतीत कह गई।  आराध्या रो रही थी। सभी उसे देख रहे थे।

इश्क की मुठ्ठी कस चुकी। वो ठंडी आवाज में बोली " मैं बुरी नहीं हूं, मुझसे से ही बुराई शुरु होती है। और अभी तुमने मेरी खुदगर्जी देखी नहीं आराध्या जिस दीन देख लोगी ना, उसके बाद दुनिया में और कुछ देख नहीं पाओगी! "

उसने फिर किसी की तरफ नहीं देखा और दनदनाते हुए घर से बाहर चली गई।

दरवाजा बंद होने की आवाज सबने सुनी। सब हैरानी से दरवाजे को देख रहे थे। आराध्या के रोंगटे खडे गये। इश्क की आवाज का ठंडापन सबने महसूस किया था।

भवानी जी चिंतित होकर रुद्राक्ष से बोली " अक्षू ये लडकी कहां चली गई इतनी रात को? "

जिसका जवाब  अभिमान  ने दिया " पडोसी है ये हमारी। "

गुरु " अब तो रोज लंका जलेगी। "

भवानी जी " अब सब सो जाओ। हम कल ठिक से बात करेंगें। और आराध्या अब रुद्र तुम्हारा बाॅस नहीं है वो तुम्हारा जेठ भी है तो इस बात का ख्याल रहे। " उनकी बात में एक वार्निंग छीपी थी। जिसे आराध्या बखूबी समझ गई।

भवन जी आराध्या से बोले " बहू! ये तुम्हारा देवर अभिमान है और ये तुम्हारा दुसरा जेठ रुद्राक्ष। तुम रुद्र और अक्षू को अपने बडे भाई जैसा समझो। " फिर वो दोनो वहां से अपने कमरे में चले गये।

रुद्राक्ष और अभिमान ने आराध्या को hii  कहा और वहां से अपने रुम में चले गये। रुद्रांश आराध्या को घुरते हुए " अपनी शादी करने गई थी मेरी भाई से शादी कर आ गई! "

आराध्या सिर जुकाकर " साॅरी बाॅस मुझे नहीं पता थी की ये आपका भाई है। "

गुरु मुंह बनाते हुए " अब बाकी बाते कल! चलो कमरे में! " गुरे आराध्या को खिंचते हुए रुम मे ले गया।

वहीं रुद्रांश अब अकेला खडा था रुम में।

वो कुछ देर रुम में खडा रहा और फिर कार की चाबी उठाकर , घर को लाॅक कर बाहर चला गया।

अगली सुबह,

रनींग ट्रेक पर भवन जी , रुद्रांश, रुद्राक्ष, गुरु और अभिमान रनींग कर रहे थे।

गुरु और अभिमान आखिर में धीरे धीरे भाग रहे थे। वो दोनो पसीने से लथपथ थे। उनके पैर कांप रहे थे। फिर भी चूं चपड़ किये बिना दौड़ रहे थे।

भवन जी तेज आवाज में " जल्दी भागो नालायको! मैं जब तुम्हारी उम्र का था तो गांव के बीस बीस चक्कर लगाता था।"

गुरु हांफते हुए " आपने गांव में इतने चक्कर चलाए गांव में की आपके बाप ने आपकी शादी 22 की उम्र में ही कर दी। "

भवन जी नें गुस्सें में उसे देखा। " बीवी क्या आई, उसकी जुबानी बोलने लगे। "

गुरु उनके पास पोहोंच कर " ओहो दादू इसमें मेरी बिवी कहां से बिच में आई? बिचारी कितनी शरीफ और भोली है। कुछ बोलती ही नहीं है। कल आपके सामने उसने उंची आवाज में बात की थी भला? जो आप उसके खिलाफ हो गये। "

भवन जी " और वो बीवी जो दुसरो के सामने अपना भूतकाल एक मिनट में बता देती है ये क्या बात हुई? कुछ राज , राज भी तो रखने होते है ना? "

इस बार रुद्राक्ष बिच में बोला " लेकिन दादू ये आराध्या और इश्क का पर्सनल मैटर है। मेरे ख्याल से हमें उसके बिच में नहीं पडना चाहिए। "

रुद्रांश भी उसकी बात पर सहमति जताते हुए " हां! अक्षू  सही कह रहा है। वैसे भी आराध्या कैपेबल है की वो अपने प्रोब्लेम खुद सोल्व कर सके। "

वो चारो खडे होकर बात कर रहे थे की अभिमान सांप की तरह रेंगते हुए उनके पास पहुंचा।

अभिमान बैंच पर बैठ गया। " अब मुझसे नहीं भागा जाएगा! दादू आपको आपकी सेंकेंड हैंड जवानी मुबारक हो हमें बक्श दो। " उसमे अपने हाथ जोड लिए।

भवन जी ने चारो भाईयो को देखा और उन पर गुस्से में बिफर पडे " चारो के चारो एक और राउंड लगाओ! ये सजा है तुम सबकी बदतमीजी की! "

चारो एक साथ हैरानी से चीखे " क्याआआआ?  "

" तुम्हारे बाप का बगीचा नहीं है जो सुबह के छह बजे चिख रहे हो! "

चारो भाई गुस्से में पलट कर देखा तो वहां इश्क किसी लडके के साथ खडी थी। वो लडका रीधम था। रीधम का हाथ इश्क के कंधे पर सपोर्ट के लिए रखा था। मगर इससे इश्क को चिढ मच रही थी।

उसे वहां देख उन पांचो का मुंह बिगड़ गया। इश्क ने अभी भी रात के कपडो में ही थी।

अभिमान " सुबह सुबह चुड़ैल देख ली! "

गुरु " अपशकुन हो गया! "

रुद्रांश " दिन बर्बाद होगा आज का! "

रुद्राक्ष " Not Again! "

भवन जी इश्क के साथ किसी लडके को देख भौंहे चढा कर

" ये कौन है? "

" कौन ये? ये तो कोई नहीं है! मेरे सिर का बोझ है बस! " इश्क ने रिधम की बांह अपने कंधे से हटाई और उसे वहीं अकेला छोड उपर जाने लगी।

रिधम लड़खड़ा कर नीचे गीर गया। " आहहहह दी! "

इश्क जाते हुए " भाड़ में गई तेरी दी और तु भी जा! "

रुद्रांश ने उसकी बांह पकड उसे खडा किया।

रुद्रांश रिधम को देखते हुए " तुम इश्क के भाई हो? "

रिधम बिचारा मुंह बना कर " ये बडे अफसोस की बात है मगर सच है! मैं ही इश्क सिंघानिया का भाई हूं! "

गुरु गुस्से में " यार बस कर दे अपनी बहन का गुणगान गाना! "

रुद्रांश फ्रस्ट्रेशन में अपने बाल खिंचते हुए " जब से मिला हूं तब से इश्क सिंघानिया ये! इश्क सिंघानिया वो! इश्क सिंघानिया किसी के पैरो में नहीं गीरती! इश्क सिंघानिया किसी से नहीं डरती! इश्क सिंघानिया! इश्क सिंघानिया! सुन सुन कर कान से खुन निकल गया। "

अभिमान भी रिधम को घुरते हुए " यार तुम लोग जेल कैसे लेते हो इस चुड़ैल को? "

रुद्राक्ष भी कहां पीछे रहता " कुछ ज्यादा ही रौब जाड़ती है तुम्हारी बहन! सबको अपने इशारे पर नचाना है इसको। मगर हम भी राणा Brothers है। ऐसे ही किसी इशारो पर नहीं नाचते! " उसने आगे आये बाल पिछे कर कहा।

रिधम को ऐसा लगा किसी ने उसके उपर हिमालय उठा के रख दिया हो। वो हैरानी में चारो भाईयों को देख रहा था। तभी उसके दिमाग में कुछ क्लिक किया।

रिधम चौंकते हुए " राणा brothers?? OMGGG मतलब आप ही दी के दुसरे ससुराल वाले हो? तब तो महाकाल भला करे आपका! "

भवन जी नासमझी से पुछ बैठे " दुसरा ससुराल? ये दुसरा ससुराल क्या होता है। "

रिधम ने अपने दांतो के बिच जीभ दबा ली। " ये बात किसी को नहीं बतानी थी। जीजू ने मना किया था। "

वो जल्दी से हड़बड़ाकर बोला " वो वो गलती से मुंह से निकल गया! " रिधम वहां से लंगड़ाते हुए जाने लगा की गुरु उसकी गर्दन पिछे से पकड अपने सामने कर " इतनी भी क्या जल्दी है साले साहब? "

रुद्रांश भी उसके सामने आकर " साले के बच्चे जल्दी मुंह खोल वरना मार मार के मुंह खुलवाउंगा! "

भवन जी भी रिधम को धमकाते हुए " बच्चे सच उगल दे वरना तुझे तिहार जेल में डाल दुंगा। मैं एक्स आर्मी ऑफिसर हूं। "

रुद्राक्ष भी आगे आकर " हाथ पेहले तुड़वायेगा या गर्दन? " उसने अपनी लेफ्ट कलाई  राईट हैंड की हथेली से घीसी।

अभिमान ने भी उसे घेर लिया " अब तुम नहीं बचोगे साले साहब! हमारी बीवी के मायके से कोई आया! चलो खातिरदारी करते है। "

रिधम चारो तरफ से घेर लिया गया। उसे ऐसा महसूस हुआ की दुश्मनो ने उसे घेर लिया हो और उसके पास कोई बेहद जरुरी जानकारी है जो ये लोग उससे चाहते है।

वो डरते हुए बोला " आप सब ऐसे क्यों देख रहे हो जैसे बिना पकाए खा जाओगे! "

भवन जी उसकी काॅलर पकड " बकवास बंद कर और सच बता! ये दुसरे ससुराल का मतलब क्या है? "

रिधम डरते हुए बोला " इश्क दी की सात साल पेहले ही शादी हो चुकी है। "

भवन जी , रुद्राक्ष,  गुरु , अभिमान के पैरो तले जमीन खिसक गई।  रुद्रांश ये बात जानता था। उसे इश्क ने ही बताया था। इसलिए उसे इतनी ज्यादा हैरानी नहीं हुई।

रुद्रांश " किससे हुई है उसकी शादी? "

रिधम तुरंत से " सुल्तान से! "

रुद्रांश उसे घुरते हुए " कौन सुल्तान? नाम ठाम तो होगा ना? और कहां का सुल्तान है? कैसा सुल्तान है? जो अपनी बीवी को घर में बैठाने के बजाए सांड की तरह खुला छोड रखा है। "

तभी इश्क वहां वापस आकर गुस्से में " तुम्हें नहीं लगता राणा की तुम्हें मेरी पर्सनल लाईफ में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी है? " इश्क ने रिधम को अपने पिछे खिंच उससे बोली " पैर तुडवा लिया है अपना अब घर चलकर अपना मुंह भी तुडवाना। "

रिधम " मैंने कुछ नहीं किया! यही लोग मुझे डरा रहे थे। "

इश्क उसे घुरते हुए " तो तेरे हाथ और जुबान में मेंहदी लगी थी? जो बोल नहीं सकता? ऐसे तो जुबान बडी तेज चलती है। मगर जहां बोलना चाहिए वहां तो बकरी की तरह मिमयाते रहता है। ऐसे बनेगा तु वकील? अदालत में खडे होने के लिए  जुबान और जिगर चाहिए! आया बडा वकालत करने वाला! तुझसे अच्छी तो रुद्रिका है। वो कभी पिछे नही पडती! बातो से ही बंदे को मार डालती है। you know what रिधम तुम मर्द जात पर कलंक हो! चलो अब! और इसकी शिकायत मैं पापा से करुंगी की तुम्हें गैरों के सामने अपनी बहन की धज्जीया उडाने में बडा मजा आता है।"

रिधम की मुठ्ठी कस गई। उसका सिर शर्म से जुक गया। इश्क ने शायद ही आज से पेहले उस पर इतना गुस्सा किया होगा।उसके बाद इश्क रिधम को लेकर वहां से चली गई।

वहीं वो पांचो जन उन दोनो भाई बहन को ही देख रहे थे।

कुछ धंटे बाद,

रुद्राक्ष और रिधम काॅलेज के निकल गये थे।

अब घर में सिर्फ  भवानी जी , भवन जी , आराध्या , गुरु , और रुद्रांश ही बचे थे। सबसे पेहले भवानी जी ने उन सबको गुरु और आराध्या की शादी कैसे हुई ये बात बताई।

उसके बाद रुद्रांश और गुरु ने अब तक की सारी कहानी अपने दादा दादी को बता दी थी। वहीं रुद्राक्ष और अभिमान ने भी अपने साथ हुई इश्क की पहली वारदात बता दी थी।

रुद्रांश ने ये भी बता दिया था की इश्क ने उसके सामने प्रपोजल रखा है की वो पेहले उन चारो भाईयों की शादी कराएगी फिर तलाक लेगी।

इतना सब भवन जी और भवानी जी का सिर घुम गया।

" यहां तो बहोत बडा कांड हो गया है बिल्लो! " भवन जी भवानी जी से परेशान भरी आवाज में बोले।

भवानी जी को शायद जिंदगी में पेहली बार चिंता हो रही थी। " मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा की क्या सोचु और क्या नहीं? "

भवन जी " हमे इश्क के पति और उसकी फैमिली के बारे में सोचना चाहिए बिल्लो! हम अपने पोतो की शादी खुद से भी करा सकते है। मगर इश्क की बनी बनाई जिंदगी हम अपने पोतो के लिए उजाड़ नहीं सकते। वो शादी-शुदा है। हम इतने खुदगर्ज नहीं है। शायद उस लडकी को अपने परीवार से मतलब हो या ना हो हमें होना चाहिए।  कल को बात हमारे खानदानकी इज्जत पर आएगी! "

गुरु कुछ सोचते हुए आराध्या से बोला " Wifey तुम्हें इश्क के फैमिली के बारे में कुछ पता है? तुम उसके साथ स्कूल में थी तो शायद तुम्हें कुछ पता होगा? "

आराध्या अपने दिमाग पर जोर डालते हुए " उसकी फैमली में? "

आराध्या तुरंत बोली " हां उसके दादा का नाम प्रताप सिंघानिया है। वो Real Estate King है। इश्क अपनी मां को अम्मी कहती थी और पापा को तो पापा ही कहती थी। मुझे लगता है इश्क के पेरेंट्स की लव मेरेज हुई होगी। "

" प्रताप सिंघानिया! " भवानी जी के होंठ हिले।

भवन जी मुठ्ठी कसते हुए दांत पिसकर " तुम्हारा आशिक बिल्लो! "

रुद्रांश और गुरु ने आंखे बडी कर एक दुसरे को देखा। उनके चेहरे पर डेविल स्माईल आ गई।

आराध्या उन दोनो को ऐसा स्माईल करता देख मन ही मन बोली " बाॅस जब जब ऐसे स्माईल करते है तब तब कांड करते है। और ये मेरा पति परमेश्वर तो..."

रुद्रांश खांसते हुए गुरु से बोला " गुरु हमारे दादा दादी तो हमसे सौ कदम आगे निकले। यहां हम भाई जवानी में भी किसी लडकी को नजरे उठाकर नहीं देखते और हमारे दादा दादी आशिकिया लडा रहे थे अपनी जवानी में! बडे रंगीन मिजाज थे? "

उसकी बांत पर गुरु स्मर्क कर " हां रुद्र बात तो सही कह रहे हो। लेकिन लडकियो के मामले में , मैं तुमसे आगे हूं। मैं तुमसे ज्यादा लडकियो को जानता हूं। "

आराध्या गुस्से में उसे घुरने लगी। वो उसके सामने ही किसी और लडकीयों की बात कर रहा था। जी तो जालेगा ही ना?

रुद्रांश आराध्या को तीरछी नजरो से देख " शायद कोई जल भुन कर राख हो रहा है तुम्हारी बातो से! "

उसका इशारा किस दिशा में था ये बात गुरु अच्छे से समझ गया। गुरु आराध्या को देख प्यार से बोलने की कोशिश की " Wifey वो सब तो पेहले की बीत थी ना? अब तो मैं तुम्हारा हूं! तुम्हारे लिए लाॅयल हूं। "

आराध्या को गुस्सा आ गया। वो जबडा कसते हुए " लाॅयल? आपको शायद पता नहीं होगा मिस्टर गर्वीत राणा की जो मर्द अपनी जुबान पर लाॅयल शब्द का 'ल' भी लाते है ना वो लाॅयलटी की धज्जीया बहोत पेहले ही उडा चुके होते है। और आप शायद उन्हीं मर्दो में से एक होंगें। तभी आपकी जुबान पर लाॅयल जैसा शब्द आया!! "

आराध्या वहां से उठकर अपने कमरे में चली गई। गुरु गुस्से में  उसे जाते देखता रह गया। वो लडकी उसके कैरेक्टर पर सवाल खडा कर चली गई और गुरु हाथ पर हाथ घरे बैठा रहा।

भवानी जी , भवन जी और रुद्रांश गुरु को घुरने लगे। गुरु ने उन तीनो को देखा और वहां से खडा होकर आराध्या के पिछे चला गया।

रुद्रांश गहरी सांस लेकर " अब आगे क्या करना है? या यहीं धरना लेकर बैठे रहना है? "

" तुम ऑफिस जाओ! आगे का मैं और बिल्लो सोच लेंगे! " भवन जी ने कुछ इशारा किया भवानी जी को।

जिसे समझ उन्होंने हां में सिर हिला दिया।

रुद्रांश अपनी जगह से उठते हुए " ठिक है तो आप डैड से कह देना वो अपनी पंचायत छोड दिल्ली संभाल ले। मैं मुबंई संभाल लुंगा। "

वो फिर बाहर चला गया।

गुरु के कमरे में,

आराध्या मुंह फुला कर गुस्से में बेड पर बैठी थी की वहां गुरु आया।

आराध्या उसके मुंह पर तकीया फेंकते हुए " क्यों आए हो यहां? चले जाओ यहां से! "

" मुझे बात करनी है Wifey! "

" मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी!"

"करनी पडेगी!"

"जबरदस्ती करोगे?"

गुरु उसके पास पहोंच जाकर "जबरदस्ती से ही सही जान पर बात तो मैं करके रहुंगा। लेकिन उसके पेहले.."

" उससे पेहले क्या? " आराध्या थोडा घबराहट से बोली।

गुरु ने आराध्या को अपनी तरफ खिंचा और उसके गाल पर किस कर " थोडा रोमांस हो जाए? "

आराध्या ने चेहरा घुमा लिया " मुझे ना बात करनी है, ना रोमांस करना है, मेरा मुड नहीं है किसी चिज का! "

गुरु कुछ पल उसे देखता रहा फिर उसे छोड कमरे से निकल गया।

उसके ऐसे जाने पर आराध्या का दिल भर आया। वो तकिये में अपना मुंह छिपा कर सिसकने लगी " मुझे नहीं रहना यहां। ये कैसा पति हुआ जिसे जब अपनी प्यास बुझाने होती है तभी मेरे करीब आता है! प्यार सृ बात तक नहीं करता। और मेंरे सामने दुसरी लडकियो की बाते करता है। लाॅयलटी की बाते करता है। हुंह्ह! मुझे नहीं रहना इसके साथ! हवसी , बेशर्म, निर्लज्ज आदमी कहीं का! उसकी वजस से कल दादी ने भी मुझे सुनाया। "

आराध्या सिसक रही थी इस बात से बेखबर की गुरु बेड के पास खडा उसकी सारी बाते सुन रहा है। उसने अपने हाथ में पकडी चाॅकलेट को बुरी तरह मसल डाला।

आराध्या की नाराजगी दुर करने के लिए गुरु उसके लिए चाॅकलेट लेने गया था। जब वो चाॅकलेट लेकर वापस आया और आराध्या के मुंह से अपने लिए इतनी गलतफहमी देख उसे बहुत गुस्सा आया।

यूनिवर्सिटी में,

इश्क अंजनी और अम्बुज के साथ कैन्टीन में बैठी थी। वो दोन उसे सब चीजे बता रहे थे की कैसे फुलादेव यूनिवर्सिटी का क्रिया कर्म हुआ और यूनिवर्सिटी का नाम बदल गया।

पुरी यूनिवर्सिटी रुद्रांश राणा ने खरीद ली। कुछ सुधार भी कर दिये यूनिवर्सिटी में। पेहले Uniform नहीं थी मगर अब रुद्राक्ष ने compulsory Uniform करवा दिया। काॅलेज का टाइम भी चेंज हो गया। एग्जाम का टाइम टेबल भी आ गया।

इतना सब सुन इश्क हलक से बर्गर का निवाला नहीं उतरा।

उसे ऐसा लगा की कोई उसे इलेक्ट्रिक शाॅक दे रहा हो।

अम्बुज उसे कोकाकोला का कैन थमाते हुए " पेहले खाना खा लो वरना गले में फंस गया जो मर जाओगी। "

इश्क ने कोकाकोला पिया और बिच में अटके निवाले को निगला।

इश्क " यार तुम दोनो मुझे ये मेसेज में बता देते। पता है मैं यूनिवर्सिटी के बाहर खडी सोच रही थी की दस दिन पेहले फुलादेव युनिवर्सिटी थी और दस दीन बाद The Crystal Spire University हो गया। अगर पवनपुत्र ना आता तो मैं वापस घर चली जाती। "

कोई कुछ बोलता उससे पेहले ही एक लडकी वहां एक कार्ड लेकर आई।

" ये हमारी यूनिवर्सिटी की ओपनिंग सेरेमनी का कार्ड है। जो की पांच दीन बाद है। प्रोफेसर रुद्राक्ष ने सबमें बांटने को कहा है। " वो लडकी वहां से चली गई।

तीनो दोस्तो नें कार्ड खोल कर देखा।

इश्क की नजर डेट पर पडी " 10th December! हमारी एग्जाम कब शुरु हो रही है? "

अंजनी " 12th December!  "

इश्क कार्ड को टेबल पर पटक कर बोली " मोरचे की तैयारी करो। अब आंदोलन होगा। यूनिवर्सिटी की ओपनिंग सेरेमनी और एग्जाम के बिच में सिर्फ एक दिन का गैप है। हम सेरेमनी की तैयारी करे या एग्जाम की? "

अचानक वहां कुछ स्टुडेंट्स का ग्रुप आया। ग्रुप का लिडर आहान आगे आकर उन तीनो दोस्तो को देख बोला " हमे प्रोटेस्ट के लिए तुम तीनो का साथ चाहिए। हम Art and Activity Department से है। प्रोफेसर रुद्राक्ष ने एक्टिविटीस की लिस्ट भेजी है और वो सारी एक्टिविटीस 24th December से होगी। और हमारी एग्जाम 23rd December को खत्म होगी। हम एक्टिविटीस पर ध्यान दे या एग्जाम पर? "

अम्बुज अंजनी और इश्क ने एक दुसरे को देखा।

वहीं अभिमान जो की जस्ट उनके टेबल के पिछे ही बैठा था मगर ये बात इश्क को नहीं पता थी। उसने तुरंत रुद्राक्ष को कुछ मेसेज भेजा।

दो मिनट बाद  ही कैन्टीन में लगे स्पीकर पर अनाउंसमेंट हुई " मोरचा मंडली अभी के अभी ग्रांउड में आकर मीले। आपका प्यारा प्रोफेसर रुद्राक्ष! "

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