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Chapter 12. [पुराने आशिको का मिलना!]

सुबह का वक्त,

यूनिवर्सिटी,

ग्राउंड में इश्क की टोली , आहान की टोली और कुछ और स्टुडेंट्स स्टेज के नीचे खडे आपस में चटर-पटर कर रहे थे।

इन सबसे दुर लास्ट में इश्क अपना कोकाकोला पीते हुए रुद्राक्ष का इंतजार कर रही थी।

तभी वहां रुद्राक्ष एक कुर्सी खिंचते हुए आया। उसके हाथ में माईक था। उसे आया देख सब शांत हो गये।

रुद्राक्ष ने स्टेज पर कुर्सी रखी और उस पर बैठ कर माईक ओन किया " हां तो जिस जिस को आंदोलन करना है उनके लिडर आगे आए। हम बात करेंगें। "

सब ने एक दुसरे के चेहरे देखे।

" ये प्रोफेसर राणा इतने बदल कैसे गये? "

" ये बाॅम्ब बर्फी बन गया? "

" ये इतनी शांती से भी बात कर सकता है सोचा नहीं था! "

" देख तो कैसे प्यार से बात कर रहे है। "

" हां! वरना क्लास में तो न्युक्लियर बाॅम्ब की तरह फटते रहते है। "

उन सबको आपस में फुसफुसाता देख रुद्राक्ष को गुस्सा आ गया। यहां वो इनसे बात करने आया था और ये लोग आपस में लगे पडे है?

वो गुस्से से बोला " ठिक है मैं जा रहा हूं। तुम लोगो के लिए मैं यहां आया था। मगर तुम्हें देख लगता है की...."

अंजनी तुरंत आगे आया। वो उसकी बात बिच में काटते हुए " हम..हम बात करते है। "

रुद्राक्ष ने घुर कर उसे देखा तो वो एक कदम पिछे हट गया।

रुद्राक्ष ने उसे फटकार लगाई " मेरी बात बिच में काटने के लिए तुम सबको पनीशमेंट के तौर पर सैम असाईमेंट तीन बार लिख कर लाने है। वो भी एग्जाम से पेहले। "

सबके हलक का पानी सुख गया। बोला एक था ,पिस सारे गये। क्या जरूरत थी उसे बिच में बोलने की? चुपचाप खडा रहता ना? सबने गुस्से में घुर कर अंजनी को देखा तो उसने अपना मुंह बना लिया।

रुद्राक्ष ने उंची आवाज कर " लिडर कहां है तुम्हारी? " उसका सीधा साफ इशारा इश्क की तरफ ही था। जिसको समझ इश्क के होंठो पर मुस्कान आ गई।

उसने अपना हाथ कैन समेत उंचा किया। सबने उसे रास्ता दिया और इश्क रुद्राक्ष के सामने आकर खडी हो गई।

रुद्राक्ष के होंठो के कोने मुड गये। उसने सिर से पैर तक इश्क को देखा।

ब्लू डेनिम , वाइट हुडी , मैसी बन , उसका चेहरा काफी प्यारा लगता था बिना मेकअप के। लेकिन वो किसी और की बिवी थी। और जिसकी थी वो भी बडा प्यारा और हैंडसम था।

रुद्राक्ष उसे कुछ देर देखता रहा फिर गहरी आवाज में बोला " किस बात के आंदोलन की तैयार कर रहे हो? वो भी बिना मेरी परमिशन के? "

इश्क उसकी आंखो में आंखे डाल " सबसे जरुरी बात प्रिंसीपल नहीं है यहां! उनकी ऐबसेंस में आपने जो डिसिजन लिया है उसी के अगेंस्ट प्रोटेस्ट होगा। आपने सेरेमनी के तुरंत बाद एग्जाम रख दिये। और एग्जाम के अगले दीन एक्टिविटीस! हम किस चिज की प्रिपेरेशन करे? सेरेमनी की? एग्जाम की? या एक्टिविटीस की? "

रुद्राक्ष बडे ध्यान से उसकी बात सुनी। फिर अपने हाथ बांधते हुए " और प्रोटेस्ट तुम किसके खिलाफ करोगी? इसकी परमिशन कौन देगा? "

" परमिशन की जरूरत नहीं है। और प्रोटेस्ट हम आपके खिलाफ करेगें। " इश्क ने अपना हाथ उठाया और जोर से चिल्लाई " प्रोफेसर राणा को निकालो! "

कोई चूं तक ना बोला तो इश्क ने सबको घुरा। वहीं रुद्राक्ष ने भी घुर कर इश्क को देखा। क्या ही नमूनी थी उसकी बीवी।

" सालो भौंको ना! " इश्क सभी से दांत किटकिटाते हुए बोली।

इश्क एक बार फिर " प्रोफेसर की नहीं चलेगी ,नहीं चलेगी। "

इस बार कुछ स्टुडेंट्स धीरे से बोले " हां नहीं चलेगी! "

रुद्राक्ष ने खा जाने वाली नजरो से उन सबको देखा तो वो खामोश हो गये।

मगर इश्क डटी रही। " राणा का राज नहीं चलेगा! नहीं चलेगा! "

अभिमान जो अभी अभी वहां आया था ये सुन वो हंसने लगा।

" हा हा हा..." उसे वहां देख इश्क को सारा माजरा समझ आ गया की रुद्राक्ष के कान भरने वाला अभिमान ही है। वरना रुद्राक्ष को कैसे पता चलता की वो मोरचा उठाने वाले थे?

इश्क और रुद्राक्ष ने उसे बिना किसी भाव से उसे घुरा तो वो चुप हो गया। बाकी सब भी उसे अजीब नजरो से देख रहे थे।

अभिमान ने मुंह बनाया और जैसे आया था वैसे ही उल्टे पैर चला गया।

उसके जाने के बाद रुद्राक्ष सबकी तरफ देखते हुए सख्ती से " तुम सब 23 24 साल के मैच्योर पर्सन बन चुके हो। सब मास्टर्स के स्टुडेंट्स हो। तब भी मैनर्स नहीं है, ना नॉलेज है , ना मेनेजमेंट आता है , अपना दिमाग लगाने में तो तुम सबको मौत आती है? , ना एकेडमिक की वेल्यू करते हो And The Most Important Thing Is That You People Do Not Know The Importance Of Time...और एज्युकेशन सिस्टम पर उंगली छोडो पुरा हाथ ही उठा देते हो। "

" सेरेमनी के बाद एग्जाम है ना? तो एग्जाम की तैयारी अभी से शुरु कर दो! ये सेरेमनी एगजाम के जस्ट पेहले इसलिए रखी है ताकी तुम सबका दिमाग जो लोहे के जंग की तरह पढाई कर जम जाएगा उससे थोडा रिफ्रेशमेंट मिल जाएगा। "

" और एग्जाम के बाद एक्टिविटीस रखी है ताकी एग्जाम जिसे तुम प्रेशर कुकर की सीटीया समझते हो ना उससे थोडा हल्का महसूस कर सको! एक्टिविटीस भी वही रखी है जो तुम सबको पेहले से आती है। जिसमे तुम माहिर हो। मगर तुम सब तो ठहरे अंधे! दिखाई कहां देगा। "

रुद्राक्ष ने गहरी सांस बाहर छोडते हुए माईक ऑफ किया। वो अपनी जगह से खडा हुआ और तेज आवाज में " इस एक्सप्लेनेशन के बाद भी प्रोटेस्ट करना है तो कर सकते हो। मगर इस प्रोटेस्ट के बाद सबके पेरेंट्स को बुलाया जाएगा और तुम्हारे पेरेंट्स के सामने तुम्हें यूनिवर्सिटी से बाईज्जत निकाल दिया जाएगा। "

उसके बाद रुद्राक्ष सबको घुरते हुए वहां से चला गया।

कुछ हैरान थे , कुछ परेशान थे , कुछ को फर्क नहीं पडा तो कुछ को रुद्राक्ष के शब्दो से इतना फर्क पडा की रोने लगे।

इश्क जबडा कसते हुए " किस हरामखोर ने प्रोटेस्ट करने का आइडिया दिया था? " सबने आहान की तरफ देखा।

तो उसकी भौहें चढ गई।

आहान ने उसको देख कहा " आइडिया मेरा था मतलब  ब्लैक भी मेरे ऊपर ही आएगा? "

" तो तेरे बाप थोडी ना आएगा! " इश्क मे अपनी हुडी की स्लीव्स उपर करली।

आहान भी अपने बाजु फोल्ड कर उसके सामने खडा होकर " वो तुम थी जो आंदोलन के लिए उछल रही थी। मैं अपनी टीम के साथ मदद मांगने आया था। लेकिन तुमने हमें ही फंसा दीया। खामखा हमारा तमाशा बना दिया। "

अम्बुज ने अंजनी और इश्क को देख फुसफुसाया " ये तो हमे अपने साथ लेकर आया था मगर प्रोफेसर के आगे तो आया ही नहीं और बोला ही नहीं। अब हम पर इल्ज़ाम लगा रहा है कुत्ता! "

अंजनी " छोड ना होते है कुछ tattu के फट्टु! ये भी वही है। "

इश्क आहान के सामने हाथ बांध " ओह रियली? मैं उछल रही थी प्रोटेस्ट के लिए?  वो तुम थे जो हमारे पास आए थे। मैं अकेले ही प्रोफेसर से बात कर लेती मगर तुम सबकी वजह से मुझे झलील होना पडा उनके सामने! और अब तुम मुझे ये कह रहे हो की मैंने तमाशा बनाया? " उसकी आवाज चिढ थी साथ ही सख्ती भी।

आहान " तुम इतने वक्त से सबको जलील करती आई हो तो कोई तो आएगा ना तुम्हें जलील करने! जैसा करोगी वैसा भुगतोगी! "

इश्क को इतना गुस्सा आया की उसने आहान के बाल पकडे और उसके पेट पर अपने घुटने से जोर से मारा। " बडा शौख है ना ज्ञान देने का? चल तुझे बाबा बना देती हूं। फिर ज्ञान बांटते रहना! " उसने दुसरी बार दो घुसे उसके चेहरे पर मारे और एक लाट पैर पर।

" आह..छोड बीच! " आहान ने भी इश्क के बाल पकड लिए।

आहान की नाक से खुन निकल ने लगा। इश्क का पंच जोरदार था। लेकिन जब उसने आहान के मुंह से बिच सुना तो उसका खुन खौल उठा।

अम्बुज अंजनी के कान में फुसफुसाया " इसका कुटाई मोड ओन हो गया! "

इश्क का गुस्सा फुंट पडा " मैं बीच? तु कुत्ते की औलाद! बहोत देखे है तेरे जैसे! साला मुझे बिच कहता है रास्कल कहीं का! बल्डी बास्टर्ड, तु कुत्ता है , कमीना है ,मा द र @ ₹ है। " इश्क उसे लात घुसो से मारने लगी, वो उसे मारते हुए ही गालीया दे रही थी । वहीं आहान भी उसे मारने लगा। मगर इश्क उसे मारने का मौका नहीं दे रही थी।

इश्क ने एक तेज लात उसके पेट पर मारी तो आहान स्टेज से टकराया। उसकी पीठ में चोट लग गई।

आहान ने तुरंत पास में पडी कुर्सी उठाई और सीधा इश्क की तरफ फेंकी तो इश्क वहां से साईड हो गई और वो कुर्सी पीछे आ रहे अभिमान के पैर में लगी और वो जमीन पर गीर गया।

जमीन घास की नहीं बनी थी। वहां सिर्फ रेत, कंकर, मिट्टी थी तो अभिमान के ठुड्डी के पास की स्कीन छील गई।

लेकिन फते की बात ये थी की किसी ने उस पर ध्यान नहीं दीया। सभी मतलब इश्क  और आहान के दोस्तों ने उन दोनो को छुडाया।

इश्क ने अपना हाथ आहान के बाल मे डाला और कसकर खींच लिए। उसी पल आहान के दोस्तो ने आहान को खिंच कर इश्क से दुर किया। इस चक्कर में आहान के काफी सारे बाल इश्क के हाथ में आ गए।

उसी वक्त स्पीकर में अनाउंसमेंट हुई  " जो लडका और लडकी ग्राउंड में मार पीट कर रहे है वो अपने पेरेंट्स को लेकर आज दो बजे प्रिंसीपल ऑफिस में आ जाए। " ये एक सख्त,  ठंडी आवाज रुद्राक्ष की थी। जिसे कुछ समय पेहले ही असिस्टेंट ने आकर सीसीटीवी फुटेज दिखाई थी।

आहान की सिट्टी पिट्टी गुल हो गई।  वो धारावी के  MLA का बेटा था। उसके बाप को पता चला की उनका बेटा एक लडकी से पिट कर आ गया तो उसके बाप की क्या इज्जत रह जाएगी?

सब वहां से अपने अपने रास्ते चले गये।

इश्क को इस घोषणा से कोई फर्क नहीं पडा। अंजनी और अम्बुज ने मिलकर उसे काफी समझाया की वो काॅलेज मे ऐसे मारपीट ना करे।

मगर इश्क ने उनकी एक नहीं सुनी और उसने गुस्से में अपना बैग उठाया " मैं घर जा रही हूं! "

अम्बुज उसे रोकते हुए " इस वक्त क्यों? " अम्बुज ने इश्क का हाथ पकडा था , इश्क अपना हाथ छुडाते हुए " वो मेरे भाई को होस्पिटल लेकर जाना है। उसका आज सुबह एक्सिडेंट हुआ था तो अपना पैर तुडवा कर बैठा है।"

अंजनी " ठिक है तुम जाओ! हम तुम्हारी यूनीफॉर्म ले लेंगे। "

इश्क थोडा रुडली " कोई जरुरत नहीं है। मैं दोपहर में आकर ले लुंगी। सिर्फ दो घंटे के लिए जा रही हूं। "

उन दोनो का मुंह बन गया। इश्क वहां से चली गई।

अंजनी " चल क्लास में चलते है। "

अम्बुज " हां चल! "

Meera Apartment,

Block no 1515,

आराध्या अभी भी सिसक रही थी की किसी ने उसका हाथ पकड खिंच लिया।

आराध्या चौकते हुए सामने देखा तो गुरु खडा था। वो गुस्से में उबल रहा था।

आराध्या गुरु को देख रही थी और गुरु आराध्या को! दोनो एक दुसरे की आंखो में गुस्सा और गलतफहमी देख सकते थे।

गुरु गुस्से में बोला " तुम्हे गलतफहमी पालने का शौख है तो बेशक से पालो पर मेरे किरदार पर उंगली मत उठाना! "

" तुम मेरे सामने किसी और लडकी की बात करो और मैं चुपचाप सुनती रहु? ये तो नहीं होगा मुझसे गुरु! तुम मुबंई आने से पेहले तो मुझसे प्यार करते थे ना? तो फिर अब वो प्यार कहां गया? या फिर इश्क को देख तुम्हारा दिल मुझसे भर गया? " आराध्या ने तंज कसा।

उसकी बात पर गुरु का जबडा कस गया। वो गुस्से में सर्द आवाजके साथ बोला " तुम बहोत बडी गलतफहमी पाल रही हो आराध्या! इस गलतफहमी से तुम हमारे रिश्ते पर उंगली उठा रही हो! मुझे इश्क से कोई लेना देना नहीं है। हां माना की हमारी शादी जबरदस्ती है मगर इसका मतलब ये नहीं मैं उससे प्यार करता हूं। मैं सिर्फ तुमसे प्यार करता हूं! मेरा दिल सिर्फ तुम्हारा है WIFEY! "

उसकी बात सुन वो व्यंग से मुस्कुराकर बोली " दिल? सारा मसला इसी दिल का है ना? मैं निकाल फेंकती हूं ये दिल! ना अब तुमसे मैं दिल लगाउंगी , ना बात करुंगी , ना तुम्हें अपनी शक्ल दिखाउंगी! "

वो कमरे से जाने लगी की गुरु उसका हाथ पकड उसे रोकते हुए " इतनी नाराजगी? इतना गुस्सा? इतनी बेरुखी सिर्फ इस वजह से की मैंने तुम्हारे सामने किसी और का जिक्र किया? "

आराध्या बिना पिछा मुडे ही बोली " हां! मैं पत्नी हूं तुम्हारी! तुम मेरे आगे किसी और लडकी का नाम तो क्या उसका ख्याल भी लाते हो तो मेरा कलेजा सुलग उठता है। अगर तुम्हें मेरी नाराजगी दुर करनी है तो मुझसे एक वादा करो! " आराध्या ने पलट कर गुरु को देखा।

गुरु भौंहे सिकुड कर बोला " कैसा वादा? "

तुम इश्क से और बाकी लडकियो से दुर रहोगे! मेरे सामने और मेरी पिठ पिछे तुम उनका नाम नहीं लोगे। तुम्हारी जिंदगी में अब सिर्फ एक ही लडकी होगी। जो तुम्हारी बिवी है। यानी मैं! आराध्या राणा! "

उसकी बात बडे गौर से सुनने और समझने के बाद गुरु हंसने लगा। उसे हंसता देख आराध्या कंफ्यूज हो गई। कोई जोक नहीं सुनाया दा उसने जो वो हंस रहा था।

गुरु अपनी हंसी कंट्रोल कर " मैं एक शर्त पर ये वादा करुंगा! "

आराध्या के मुंह से चंद लफ्ज निकले " वादा शर्तो पर नहीं होता! "

गुरु ने गहरी आवाज में कहा " मेरा वादा शर्तो पर होगा! वो शर्ते मैं बनाउंगा! तुम्हें उन्हें मानना पडेगा…शर्त नहीं, वादा नहीं! "

आराध्या उसके चेहरे पर इंमोशन्स ढुंढने लगी। गुरु बिना किसी भाव के उसे ही देख रहा था।

आराध्या सोचने लगी की गुरु उसके सामने क्या शर्त रखेगा? क्या ही शर्त रख सकता है वो? वो तो अभी पुरी तरह से एक दुसरे को जानते तक नहीं है? उन्हें मिले महज एक हफ्ता हुआ है।

थक हार कर आराध्या बेड पर बैठ गई। " कैसी शर्त बताओ! "

गुरु उसे देख सर्द आवाज में " तुम अपनी जाॅब छोड दोगी! जब तुम्हें मेरा, लडकीयो के नाम लेने पर इतनी परेशानी है तो तुम्हारे ऑफिस में फिमेल से ज्यादा मेल है। तुम जिनके साथ मिटिंग करती हो वो भी मेल होते है। तुम्हारा जो बाॅस है, वो मेरा भाई है, जो की एक लडका है। तुम्हारे क्लाइंट भी अक्सर मर्द ही होते है। इतने सारे लडको को तुम्हारे आसपास देख मैं पल पल जलना नहीं चाहता इसीलिए अगर मुझसे वादा चाहिए तो शर्त पुरी करो, अपनी जाॅब से रिजाईन कर दो! "

गुरु मुडा और शैतानी मुस्कान लिए बाहर चला गया। " फंस गई मछली जाल में! " उसने बडी ही अदा से अपने चेहरे पर चश्मा लगाया और घर से बाहर निकल गया।

वहीं उसके मुंह से नौकरी छोडने की बात सुन आराध्या के पैरो तले जमीन खिसक गई। वो हैरानी से दरवाजे के देखने लगी। वो जाॅब नहां छोड सकती थी। पांच साल की मेहनत थी उसकी! इस पोजीशन पर आने के लिए उसने अपनी रात दीन की निंद , दर्द , वक्त सब ज़ाया किया था। वो ऐसे कैसे अपनी काबिलियत पर बनाई इज्जत छोड सकती थी।

रुद्रांश की सेक्रेट्रि की जाॅब सिर्फ जाॅब नहीं एक पोजिशन थी। जहां का सपना काफी लोगो ने देखा था मगर काबिलियत सिर्फ आराध्या में थी। उसके अपने डिसिजन और डेडिकेशन से उसे आज एक नाम मिला था।

दुसरी तरफ,

गार्डन में ,

भवन जी और भवानी जी गार्डन से वापस आ रहे थे।

वो दोनो किसी बात पर मुस्कुराकर बात कर रहे थे।

तभी भवानी जी की नजर एक जगह पर जम गई। वर्षो बाद उस एक चेहरे को देख उनकी आंखें चमक उठी। होंठो पर मुस्कान बिखर गई।

उन्होंने भवन जी का हाथ छोडा और तेजी से चलने लगी। भवन जी की भौंहे सिकुड गई।  उनको भवानी जी का हाथ छोडना कतई पसंद नहीं आया।

लेकिन जब उन्होंने देखा की भवानी जी कहां जा रही है तो उनको ज्यादा हैरानी हुई। अगले ही पल वो गुस्से से भवानी जी के पिछे तेजी से जाने लगे।

वहीं भवानी जो अब उस शख्स से बस दस कदम की दुरी पर थी। बिच में कार थी। कार की इस साईड प्रताप जी खडे थे।

तभी दुसरी साईड से माला जी बाहर आई।

माला जी को देख भवानी जी के कदम अपनी जगह जम गये। उनकी आंखो की चमक फिकी पड गई। मगर भवन जी ने माला जी को देखा तो वो शाॅक्ड हो गये। एक ऐसा चेहरा जो काफी दशको बाद देखा था। करीबन.......

आप लोग खुद देख ले🤣🤣🤣

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ये दोनो बुढे हो गये🤣🤣🤣🤣🤣मतलब अब क्या बोलू यारों🤣🤣🤣 मेंने जिस हिसाब से अंदाजा लगाया था उस हिसाब से तो अभी माला, प्रताप, भवन और भवानी जी 70-72 साल के होंगे...लेकिन नहीं...बिस्तर पर लेटने की उम्र में आशिको का meet up hoga...

👆🏻👆🏻उपर दी गई सच्चाई से कहानी का कोई वास्ता नहीं है।🤣

81 की उम्र में दादी खिडकी लांघकर आई थी बहु से मिलने/तो दुसरा अपनी पोती के पिछे इत्र की शीशी की वजह से भाग रही थी👈🏻

इन दोनो का सही निकला...

मगर देखो..

22 years bhavan ji marriage..19 years bhavani ji

प्रताप ji 23 years...18 years mala ji

जब इनकी एज में कुछ ही फासले है तो केल्क्युलेशन में इतना बडा फर्क क्यों भाई?  अपने भवन जी और भवानी जी 75 के ही है। 😈☠️

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वहीं माला जी को देख भवन जी का चाल धीमी हो गई तो भवानी जी के पैरो को जमीन ने जकड लिया।

दोनो मिया बिवी माला जी और प्रताप जी को देख रहे थे।

तभी रिधम की चिख से दोनो की तंद्रा टुटी। इश्क जो रिधम को कार से बाहर निकाल रही थी अंजाने में उसने रिधम के प्लास्टर लगे पैर पर अपने पैर मार दिया था।

माला जी उसे हल्का डांटते हुए " इश्क ध्यान से! " इश्क की आंखे छोटी हो गई।

" आप खुद निकाल ले इसे! वैसे भी पनौती है मेरे सिर की! "

रिधम मायूस होकर " ऐसा क्यों बोल रही हो दी? मैंने जानबूझकर नहीं किया था एक्सिडेंट! अंजाने में हुआ था। और रात का वक्त था तो ध्यान नहीं गया। "

उसका मायूस चेहरा देख इश्क को चिढ़न हुई " हां तुझे मेरे बाप ने बोला था ना हैदराबाद से मुबंई बाईक लेकर आने को? वो भी मेरी बाईक लेकर! पता है मेरी वो पेहली बाईक थी जिसे मैंने अपनी मेहनत से कमाए पैसो से खरीदा था। तुडवा कर आ गया मेरी बाईक और अपनी ये फुटी टांग! "

इश्क ने व्हीलचेयर पर रिधम को ध्यान से बैठाया और जैसे ही पलटी उसकी नजर भवन जी और भवानी पर गई।

उन्हें देख इश्क हिचकिचाते हुए " आप दोनो यहां? "

प्रताप जी और माला जी ने गर्दन घुमाकर देखा।

माला जी की आंखो में एक जज्बात उमड आया और प्रताप जी के हाथ से फोन छुट गया।

प्रताप जी " फुलझड़ी! "

भवानी जी " Pattu "

माला जी " भानू! "

भवन जी " चंपा!

उनके मुंह से अंजान लोगो के लिए निकमेन सुन रिधम और इश्क को झटका लगा। उन दोनो भाई बहन के लिए ये चारो एक दुसरे से अंजान थे पर...वो चारो एक दुसरे को जानते थे।

चारो आमने सामने खडे थे। आखिर इतने सालो बाद मिले थे आशिक! क्या ही महोब्बत थी उनकी जो आज इतने सालो बाद फिर मिल गये।😆

वो चारो एक दुसरे की आंखो में नमी और प्यार का जज्बात लेकर एक दुसरे को देख रहे थे की इश्क एक बार फिर बोली " आप दोनो यहां क्या कर रहे हो? इतनी धुप में टहलने आये हो क्या? "

इश्क की बात पर भवानी जी की आंखे छोटी हो गई। वो नाराजगी से बोली " हम भी यहीं रहते है। इसी सोसाइटी में, हमारा भी हक है गार्डन पर। "

प्रताप जी भी उसे डांटते हुए " तुम्हें उससे क्या की वो टहलने आये हो या नहाने! "

माला जी ने तुरंत उन्हें कोहनी मारी।

इश्क आंखे बडी कर प्रताप जी को देखने लगी। वाकई उसे हैरानी हुई थी की उसका दादा सिर्फ अपने पोते पोतीयों की तरफदारी के अलावा भी किसी की तरफदारी करेगा।

रिधम " आप चारो जानते हो एक दुसरे को? "

चारो एक साथ बोले....

प्रताप जी " हां "

माला जी " नहीं "

भवानी जी " हां "

भवन जी " नहीं "

रिधम ने इश्क की तरफ देखा " दीदी टाई हुआ! "

तभी पता नहीं कहां से वहां गुरु आ टपका!

उसके हाथ में एक पार्सल था। अपने दादा दादी के साथ दो और बुढे लोग + इश्क और wheelchair पर रिधम को देख वो उनके पास रुक गया।

गुरु सबको देखते हुए " क्या हो रहा है यहां? कोई लड़ाई मैंने मिस कर दी। "

भवानी जी गुस्से में बोली " हां आजा! तेरी ही कमी थी! "

गुरु का मुंह बन गया " बुढापा आ गया मगर जवानी की तीखी जुबान नहीं गई। "

तभी प्रताप जी ने उसके सिर पर टपली मारते हुए " तुम्हें क्या परेशानी है उसकी जुबान से? कितना मिठा बोलती है इस उम्र में भी! "

माला जी और भवन जी ने खा जाने वाली नजरो से प्रताप जी को देखा। भवानी जी बल्श करने लगी। " क्या तुम भी pattu " उन्होंने हल्के हाथ से उनके सीने पर मारा।

भवन जी ने तुरंत उन्हें अपने पिछे खिंच लिया। वहीं माला जी ने भी प्रताप जी को पिछे खिंचा।

अब माला जी और भवन जी आमने सामने थे। माला जी के चेहरे पर मुस्कान आ गई।  वो प्यार से बोली " कैसे हो भानू? "

भवन जी शर्माते हुए " तुम कैसी हो चंपा? "

माला जी " तुम पेहले बताओ..मैंने पेहले पुछा था! "

भवन जी " तुम पेहले बता दो!..लेडिज फर्स्ट! "

माला जी बल्श करते हुए " ठिक हूं! अब तुम बताओ! "

भवन जी के चेहरे पर ना मिटने वाली मुस्कान आ गई " तुम्हें देख ठिक हो गया! "

वहीं रिधम , गुरु और इश्क,  आंख फाडे ,मुंह खोले उनका खुलमखुला इतने प्यार से हालचाल पुछने का तरीका देख रहे थे। उन तीनो को हद्द से ज्यादा हैरानी हुई थी।

गुरु अपना गला साफ करते हुए खांसा , फिर बोला " हां इससे पेहले तो मेरी दादी अपको हार्ट अटैक देती थी? झाडू से मारती थी? खून चुस्ती थी आपका? बिल्ली की तरह नौच खाती थी ? तभी तो आपने उनका नाम बिल्लो रखा है? हैं ना? "

इश्क उन चारो को देख बोली " आप सब एक दुसरे को जानते हो तो पेहले हां ना क्यों किया? सीधा बोल देते की हां हम जानते है? "

रिधम भी कहां पिछे रहने वाला था " लेकिन इनकी Grand masti to देखो पेहले हां ना कर रहे थे! और अब कितने प्यार से बात कर रहे है वो भी निकनेम युस कर..चंपा , भानू , फुलझड़ी और वा आखरी क्या था? "

गुरु और इश्क साथ बोले " Patttuuu " उन दोनो ने कुछ ज्यादा ही खिंच लिया नाम।

चारो ने घुरकर उन तीनो को देखा!

भवन जी गुरु के गाल पर थप्पड मारते हुए " बेशर्म कहीं का! "

भवानी जी " जुबान काट ले अपनी। या फिर जहर खा ले! कडवा करेला! "

वो दोनो वहां से चले गये। लेकिन गुरु वहीं खडा रहा।

माला जी " तुम दोनो को घर चलकर बाताती हूं, दुसरो से तमीज से बात करने के गुण तो किसी चोर बाजार में बेच दिये। रिधम तुम ना दुर रहो इश्क से! इसके जैसे बनते जा रहे हो! "

" खबरदार जो मेरी बहन के बारे में कुछ बोला तो! " रिधम ने इश्क का हाथ पकड लिया तो इश्क उसका हाथ झटकते हुए

" हट बे! बहन का चमचा! " रिधम का मुंह बिचक गया।

प्रताप जी इश्क से " तुम किसी लडके को पिट के आई हो? तुम्हारे प्रोफेसर मिस्टर राणा का फोन आया था मुझे। "

गुरु जो जा रहा था ये सुन वो रुक गया। उसकी आंखे चमक उठी। वो वहीं रुक उनकी बाते सुनने लगा।

इश्क भौंहे चढा कर " फोन आया था ना? तो अब आप इस टुटी टांग [रिधम] को लेकर घर जाओ! मैं हैंडल कर लुंगी! "

प्रताप जी " लेकिन मुझे आने को बोला है! "

इश्क जो अपनी कार के पास जा रही थी वो मुडकर बोली

" मैं कह दुंगी आप कोमा में हो। हार्ट अटैक आया था आपको। " फिर वो हंसते हुए कार लेकर चली गई।

प्रताप जी आंखे फाडे जाती हुई कार को देखते रहे। क्या मतलब ये लडकी हैंडल करने के नाम पर किसी जिंदा इंसान को अस्पताल के बेड पर लेटा दे!

गुरु ने इस मौके का फायदा उठाया और उसने रिधम के हाथ में बोक्स थमाते हुए " इसे 1515 में पहुंचा देना। "

उसने रिधम की हां , ना , कोई बात नहीं सुनी और अपनी बुलेट[बाईक] इश्क की गाडी के पीछे चला दी।

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अगले भाग में हम देखेंगे

रुद्राक्ष को देख आहान की मां की हवस जाग गई।

आहान की मां गुरु को देख इश्क से  " ये तुम्हारा भाई है? "

इश्क गुस्से में " पति है मेरा! "

इश्क " आपके बेटे ने हमारी यूनिवर्सिटी की एक First  year wali 2 send year wali और चार मास्टर्स वाली अलग अलग डिपार्टमेंट की लडकियो को अपने प्यार के जाले में फंसाया है। सिर्फ लडकिया ही नहीं इसने तो लडको को भी नहीं बक्शा! लडको से लडकी बन बात करता है। सिर्फ हमारी यूनिवर्सिटी ही नहीं सामने वाली Nobel यूनिवर्सिटी में भी ये सफेद चुना लगा रहा है सबको! "

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